अभिनेता और मेरठ से लोकसभा सांसद अरुण गोविल ने 16 दिसंबर 2024 को लोकसभा की विंटर सेशन में शून्यकाल के दौरान फिल्म उद्योग के कामगारों के हक में अपनी आवाज उठाई। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों, तकनीशियनों और छोटे कलाकारों की स्थिति सुधारने और उनके लिए बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग की थी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत के दौरान अरुण गोविल ने बताया कि मैं हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया का आभार व्यक्त करना चाहता हूं। संसद में फिल्म इंडस्ट्री की चिंताओं को उठाने के बाद, सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मुद्दे पर ध्यान दिया। श्रम मंत्री ने भी इस पर उचित ध्यान दिया, और मैं तब से इस मामले पर लगातार फॉलो-अप कर रहा हूं। अरुण गोविल ने आगे बताया- मेरे मन में विचार आया कि मुझे अपनी इंडस्ट्री के लिए कुछ करना चाहिए। इसके बाद मैंने फिल्म फेडरेशन के अध्यक्ष बीएन तिवारी से बात की और पूछा कि हमारे सामने कौन-कौन से मुद्दे हैं और क्या अब तक इस पर कोई प्रेजेंटेशन दी गई है। उन्होंने मुझे बताया कि पहले कुछ प्रेजेंटेशन दी जा चुकी हैं। फिर मैंने उनके साथ बैठकर चर्चा की, जरूरी मुद्दे निकाले और एक दिन उन सभी मुद्दों को संसद के सामने रखा। इससे फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव आएगा। मेरा मानना है कि बदलाव हमेशा अच्छे के लिए किया जाता है। इससे सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा काम के घंटे, पेमेंट और काम से जुड़ी दूसरी जरूरी चीजों में भी सुधार होगा। कुल मिलाकर इन सभी मामलों में सकारात्मक बदलाव आएगा। बता दें कि फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (एफडब्ल्यूआईसीई) काफी समय से फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों, तकनीशियनों और छोटे कलाकारों की स्थिति सुधारने का मुद्दा उठती रही है। जिसमें काम के घंटे, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समय पर भुगतान से संबंधित मामले शामिल हैं।
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