24 साल बाद भी 2002 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘राज’ आज भी खास है, क्योंकि इसने टेक्नोलॉजी से ज्यादा ‘कहानी’ और ‘भावनाओं’ पर जोर दिया था. ‘राज’ इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि बिना किसी महंगे प्रोस्थेटिक्स के, सिर्फ साउंड और लाइटिंग का इस्तेमाल करके दर्शकों को कैसे डराया जा सकता है. 1 फरवरी को रिलीज हुई यह फिल्म हमेशा बॉलीवुड के लिए एक ‘बेंचमार्क’ रहेगी.
नई दिल्ली. 1 फरवरी 2002 का दिन बॉलीवुड के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है. यह वह दिन था जब सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई जिसने दर्शकों की रूह कंपा दी. बिना किसी बड़े सुपरस्टार के और सीमित बजट में बनी ‘राज’ ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे, बल्कि बॉलीवुड में ठंडे पड़े हॉरर जॉनर में भी नई जान फूंक दी. आज फिल्म को रिलीज हुए 24 साल हो गए हैं, लेकिन इसका डर और इसके गाने आज भी उतने ही ताजा लगते हैं.

‘राज’ की सफलता की कहानी पर्दे पर दिखाई गई रोमांचक कहानी से भी ज्यादा दिलचस्प है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म के डायरेक्टर विक्रम भट्ट और प्रोड्यूसर महेश भट्ट एक ‘इरोटिक-हॉरर’ फिल्म बनाना चाहते थे. शुरुआत में, ‘आदित्य धनराज’ के लीड रोल के लिए अनिल कपूर पहली पसंद थे. अनिल कपूर ने कहानी सुनी लेकिन मना कर दिया, यह कहते हुए कि बॉलीवुड में हॉरर फिल्मों का कोई भविष्य नहीं है.

इसके बाद, यह फिल्म उस समय के ‘सेंसेशन’ ऋतिक रोशन के पास गई. ऋतिक भी इस डरावनी दुनिया का हिस्सा बनने को तैयार नहीं थे. आखिरकार, फिल्म का लीड रोल डीनो मोरिया को मिला, जो उस समय एक उभरते हुए मॉडल और एक्टर थे. इस बीच लीजा रे के पीछे हटने के बाद, बिपाशा बसु फीमेल लीड के लिए आईं. उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि दो ‘नए कलाकार’ मिलकर बॉक्स ऑफिस पर ‘देवदास’ जैसी बड़ी फिल्मों को टक्कर देंगे.
Add News18 as
Preferred Source on Google

कहा तो ये भी जाता है कि ‘राज’ की शूटिंग ऊटी के मशहूर फर्न हिल होटल में हुई थी. यह फिल्म न सिर्फ पर्दे पर बल्कि पर्दे के पीछे भी डरावनी साबित हुई. पूरी फिल्म यूनिट को वहां कुछ ऐसी घटनाओं का सामना करना पड़ा, जिन्हें याद करके आज भी उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक रात, बिपाशा बसु और फिल्म का क्रू सो रहे थे, तभी उन्हें अपने ऊपर वाले फ्लोर पर भारी फर्नीचर घसीटने की आवाजें सुनाई दीं. नाचने और चिल्लाने की आवाजें इतनी तेज थीं कि कोई सो नहीं पाया. जब उन्होंने सुबह मैनेजर से शिकायत की तो उसने जो बताया, उससे सब हैरान रह गए. मैनेजर ने कहा था, ‘होटल में उस कमरे के ऊपर कोई फ्लोर नहीं है.’ इस घटना के कुछ समय बाद होटल बंद हो गया और आज भी वह एक खंडहर की तरह वहीं खड़ा है.

‘राज’ सिर्फ 5 करोड़ रुपये के मामूली बजट में बनी थी. उस दौर में हॉरर फिल्मों को ‘बी-ग्रेड’ माना जाता था, लेकिन भट्ट कैंप ने इसके प्रेजेंटेशन और म्यूजिक पर इतनी मेहनत की कि फिल्म ‘ए-लिस्ट’ बन गई. विकिपीडिया के अनुसार, 5 करोड़ में बनी इस फिल्म का टोटल वर्ल्डवाइड कलेक्शन बॉक्स ऑफिस पर 37 करोड़ रुपये था. इतना ही नहीं, यह साल 2002 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म भी बनी थी.

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत आशुतोष राणा थे. प्रोफेसर अग्नि स्वरूप के रोल में ‘भूत भगाने’ का उनका अंदाज और उनकी डरावनी चीखें दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ गईं. वहीं, विलेन के तौर पर मालिनी शर्मा ने अपनी आंखों की चमक और रहस्यमयी हंसी से ऐसा डर पैदा किया कि सिनेमाघरों में दर्शकों के रोंगटे खड़े हो गए थे.

हॉरर फिल्मों में अक्सर म्यूजिक कमजोर होता है, लेकिन ‘राज’ के साथ ऐसा नहीं था. नदीम-श्रवण की जोड़ी ने इस फिल्म के लिए ऐसा म्यूजिक बनाया कि इसके गाने फिल्म रिलीज होने से पहले ही चार्टबस्टर बन गए. ‘आपके प्यार में’, ‘तुम अगर सामने आ जाओ’ और ‘जो भी कसमें खाई थीं’ जैसे गानों ने युवाओं को दीवाना बना दिया. अलका याग्निक और उदित नारायण की आवाजों ने इस हॉरर फिल्म को म्यूजिकल हिट बना दिया.

बता दें, जब यह फिल्म 1 फरवरी 2002 को रिलीज हुई तो ट्रेड एनालिस्ट्स ने इसके एवरेज रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन पहले हफ्ते के बाद इसने जो रफ्तार पकड़ी, उसने सबको हैरान कर दिया. इस फिल्म ने बिपाशा बसु को ‘हॉरर क्वीन’ का टाइटल दिलाया और बॉलीवुड में ‘राज’ फ्रेंचाइजी की नींव रखी. इसके बाद कई सीक्वल आए, लेकिन पहली फिल्म जैसा प्योर हॉरर और सस्पेंस फिर कभी नहीं बन पाया.
Discover more from Entertainment News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.