ये जोड़ी बॉलीवुड के इतिहास में सस्पेंस थ्रिलर का पर्याय बन चुकी है. चॉल के उस छोटे-से कमरे से निकलकर उन्होंने न सिर्फ अपना मुकाम बनाया, बल्कि कई सितारों को आसमान भी दिया. जानते हैं कौन सी है ये जोड़ी…
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में एक दौर ऐसा भी आया जब दर्शक थिएटर में बैठते ही जानते थे कि कहानी सीधी नहीं होगी. हर किरदार के पीछे कोई राज होगा, हर मुस्कान में शक की गुंजाइश और क्लाइमैक्स में ऐसा ट्विस्ट जो पूरी कहानी को उलट दे. दिलचस्प बात यह है कि इस सस्पेंस साम्राज्य की नींव किसी फिल्मी घराने ने नहीं, बल्कि म्यांमार से भारत आए एक बढ़ई परिवार के दो बेटों ने रखी थी. संघर्ष, मेहनत और तकनीकी समझ के दम पर इन भाइयों ने बॉलीवुड में ऐसी पहचान बनाई कि वे थ्रिलर फिल्मों के मास्टर कहलाए.

राजेश खन्ना, जीतेंद्र, अक्षय कुमार, शाहरुख खान, आयुष्मान खुराना और राजकुमार राव जैसे कई नाम हैं, जिन्होंने अपनी कलाकारी से लोगों के दिलों पर राज किया. इन स्टार्स का कहानी तो आप जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं इन स्टार्स को हिट बनाने वाले कुछ डायरेक्टर्स की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. ये वो जोड़ी है, जिन्होंने जिन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्में बनाई हैं. फाइल फोटो.

सिनेमा के प्रेमी हैं तो एक जोड़ी आपने हमेशा सफेद कपड़ों में देखी होगी. ‘खिलाड़ी’, ‘ऐतराज’, ‘बाजीगर’, ‘रेस’ और ‘अजनबी’ जैसी कई फिल्मों को डायरेक्ट करने वाली ये जोड़ी है डायरेक्टर अब्बास मस्तान की. 1990 के दशक में जब पारिवारिक और रोमांटिक फिल्मों का बोलबाला था, तब इन्होंने अपराध, धोखे और रहस्य से भरी कहानियों के जरिए दर्शकों को नया सिनेमाई अनुभव दिया. उनकी फिल्मों की पहचान बनी. तेज रफ्तार स्क्रीनप्ले, स्टाइलिश ट्रीटमेंट और रोंगटे खड़े करने वाली चौंकाने वाला अंत. फाइल फोटो.
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अक्षय कुमार, शाहरुख खान, बॉबी देओल और अक्षय खन्ना को इसी जोड़ी ने सुपरस्टार मनाया है. अक्षय कुमार की फिल्म ‘खिलाड़ी’ से अक्की की किस्मत का सितारा चमका, शाहरुख के लिए ‘बाजीगर’ उनके लिए लकी साबित हुई. वहीं, बॉबी देओल और अक्षय खन्ना ने उनकी कई फिल्मों में काम किया है. सिर्फ हीरो नहीं वह कई एक्ट्रेसेस के लिए भी लकी साबित हुई. शिल्पा शेट्टी, बिपाशा बसु और प्रीति जिंटा को उन्होंने अपनी ही फिल्मों से लॉन्च किया है. फाइल फोटो.

अब्बास, मस्तान और हुसैन तीनों भाई हैं, जो गुजरात से ताल्लुक रहते हैं. उनका जन्म सूरत में हुआ था. इनका पूरा नाम अब्बास बर्मावाला, मस्तान बर्मावाला है. दरअसल,, उनके दादा बर्मा आज का म्यांमार के रहने वाले थे और उनका फर्नीचर का कारोबार था. हालांकि, बाद उनके दादा बर्मा से भारत आकर बस गए. लेकिन, उनके नाम के पीछ सरनेम जुड़ गया बर्मावाला. बाद में अब्बास और मस्तान दोनों अपने पिता के साथ मुंबई आ गए और कोलावा में वह एक चॉल में रहने लगे और यहां उन्होंने भी फर्नीचर का धंधा शुरू कर दिया. ये तीन भाई है अब्बास, मस्तान और हुसैन. अब्बास से दो साल छोटे हैं मस्तान और सबसे छोटे हैं हुसैन. फाइल फोटो.

तीनों भाई एक साथ परिवार के साथ चॉल में रहते थे. कहा जाता है कि जब 8-10 साल के हुए तो अब्बास और मस्तान स्कूल जाने के साथ-साथ वह अपनी पिता के साथ उनके काम में उनकी मदद किया करते थे और कभी-कभी तो उन्हें पिता की दुकान पर भी बैठना पड़ जाता था. लेकिन, उनका मन इस बिजनेस में नहीं लगते थे. तो फिर इनकी एंट्री फिल्मी जगत में कैसे हुई? दरअसल, इनके एक मामा थे, जो गुजराती फिल्मों में एडिटर के तौर परप काम किया करते थे. कभी-कभी ये दोनों भाई मामा के साथ उनके स्टूडियो में जाते थे, जहां दोनों को काफी मन लगता था. फाइल फोटो.

आर्थिक तंगी के कारण अब्बास ने सिर्फ 9वीं तक पढ़ाई की और परिवार की देखरेख का फैसला किया. अब्बास ने शुरुआत में फिल्मों की एडटिंग का काम शुरू किया. धीरे-धीरे ये काम बढ़ता गया. फिल्म ‘गंगा की सौगंध’ के दौरान दोनों भाईयों ने साथ में एस्टिटेंड डायरेक्टर के रूप काम किया. फिल्मों में लगातार काम करते हुए उन्हें साल 1985 में उन्हें एक गुजराती फिल्म को डायरेक्ट करने का मौका मिला. इसके बाद तीनों भाई ने साथ में काम करना शुरू किया. अब्बास मस्तान ने फिल्मों को डायरेक्ट किया और उनके सबसे छोटे भाई हुसैन ने फिल्मों में एडटिंग का काम शुरू किया. फाइल फोटो.

इन तीनों भाईयों की पहली हिंदी फिल्म थी ‘अग्निकाल’, जिसमें उन्होंने जितेंद्र और राज बब्बर के साथ काम किया था. दोनों भाई से फिल्म को डायरेक्ट किया और सबसे छोटे भाई ने फिल्म के एडटिंग का जिम्मा संभाला. इस फिल्म के बाद इनका हिंदी सिनेमा में सफर शुरू हो गया. साल 1992 आई फिल्म ‘खिलाड़ी’ सिर्फ अक्षय कुमार ही नहीं बल्कि इस डायरेक्टर जोड़ी को लिए भी हिट रही. इसके बाद ‘बाजीगर’, जिस फिल्म के लिए शाहरुख खान को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था. कहा जाता है कि इस अवॉर्ड के मिलने के बाद किंग खान उनके पास उनके घर पहुंचे थे. कहा जाता है सुबह का 4 बजा था. शाहरुख उनके घर पहुंचे तो देख दंग रह गए क्योंकि पूरा परिवार एक चॉल में एकसाथ सोया हुआ था. शाहरुख ने उनके पैर छुए और कहा, ये सब आपकी वजह से ही मुमकिन हो सका है.

2000 के दशक में मल्टीस्टारर फिल्मों का दौर आया, तब भी इस जोड़ी ने अपनी पकड़ बरकरार रखी. बड़े बजट और भव्य प्रस्तुतियों के बीच भी सस्पेंस की डोर कभी ढीली नहीं पड़ी, हालांकि समय के साथ दर्शकों की पसंद बदली और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दौर आया, लेकिन उनकी बनाई क्लासिक थ्रिलर आज भी टीवी और ओटीटी पर लोकप्रिय हैं. फाइल फोटो.
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