आज हम जिस एक्टर की बात कर रहे हैं, वे रिश्ते में राज कपूर के चाचा लगते हैं. वह अपने मेहनत और टैलेंट के दम पर फर्श से अर्श तक पहुंचे थे. वे बतौर हीरो 21 फ्लॉप फिल्में देने और फिल्ममेकिंग में भारी नुकसान उठाने के बाद कंगाली की कगार पर पहुंच गए थे. उन्होंने लगभग 9 सालों के लंबे इंतजार के बाद फिल्म ‘जौहर महमूद इन गोवा’ से खलनायक के रूप में नई पारी शुरू की. उनकी भूरी आंखों और कड़क अंदाज ने उन्हें विलेन के तौर पर पहचान दिलाई, लेकिन ‘डॉन’ फिल्म के ‘नारंग’ किरदार ने उन्हें अमर कर दिया. 500 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले कमल कपूर आज भी सिनेमा जगत के बेहतरीन विलेन्स में गिने जाते हैं.
पृथ्वीराज कपूर के भाई थे कमल कपूर
कमल कपूर की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया जब उनके पास लगातार 9 सालों तक कोई काम नहीं था. वे पूरी तरह सड़क पर आ चुके थे और फिल्म इंडस्ट्री उन्हें लगभग भुला चुकी थी. लेकिन 1965 में आई फिल्म ‘जौहर महमूद इन गोवा’ उनके डूबते करियर के लिए संजीवनी बूटी साबित हुई. इस फिल्म में वे पहली बार एक विलेन के रूप में पर्दे पर आए. उनकी नीली-भूरी आंखें और कड़क आवाज खलनायक के किरदार के लिए एकदम फिट बैठीं. यहीं से उनके करियर की दिशा बदल गई और जो कमल कपूर हीरो बनकर फेल हो गए थे, वे विलेन बनकर घर-घर में मशहूर होने लगे.
500 से ज्यादा फिल्मों में किया काम
कमल कपूर ने अपने पूरे करियर में 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘पाकीजा’, ‘दीवार’ और ‘मर्द’ जैसी बड़ी फिल्में शामिल हैं. लेकिन उन्हें असल पहचान मिली अमिताभ बच्चन की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘डॉन’ में ‘नारंग’ के किरदार से. नारंग के रूप में उनके खौफनाक अंदाज और अमिताभ के साथ उनकी टक्कर ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे. उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आपमें हुनर है, तो पहचान मिलने में देर भले ही लगे, पर वह मिलती जरूर है. आज भी जब बॉलीवुड के यादगार विलेन्स की बात होती है, तो कमल कपूर का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है.
About the Author

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
Discover more from Entertainment News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.