Most Suspense Thriller film : कुछ फिल्में ऐसी होती है जो शुरू होते ही दर्शकों को अपने मोहपाश में बांध लेती है. फिर तो एक सेकंड के लिए भी दर्शक अपनी पलके नहीं झपका पाते. 70-80 के दशक में मनमोहन देसाई इसी फॉर्मूले पर फिल्में बनाया करते थे. 11 साल पहले बॉलीवुड के जाने-माने डायरेक्टर ने सिर्फ 14 मिनट की एक ऐसी शॉर्ट सस्पेंस थ्रिलर फिल्म बनाई थी जिसका क्लाइमैक्स देख दर्शकों का दिमाग सुन्न पड़ गया था. दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्म यूट्यूब पर उपलब्ध हैं. 30 मिलियन से ज्यादा इसके व्यूज हैं. इस फिल्म का लास्ट सीन कई दर्शकों को समझ नहीं आया था. फिल्म शालीन कामुकता से भरी हुई है. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं……..
2012 में विद्या बालन स्टारर सस्पेंस थ्रिलर मूवी कहानी आई थी जिसका डायरेक्शन सुजॉय घोष ने किया था. लो बजट में बनी इस फिल्म ने शानदार कलेक्शन किया था. यह एक मैसिव हिट फिल्म साबित हुई थी. इस फिल्म से हिंदी सिनेमा ने नया रुख लिया. दर्शकों ने सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों पर प्यार बरसाया. फिर सुजॉय घोष जुलाई 2015 में एक शॉर्ट फिल्म लेकर आए. नाम था : अहल्या (अहिल्या). इस शॉर्ट फिल्म ने सभी को दीवाना बना लिया था. रामायण की पौराणिक कथा पर आधारित इस फिल्म को यूट्यूब पर 22 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है. यह फिल्म अहिल्या की पौराणिक कहानी का आधुनिक रूपांतरण थी. इसमें नारीवादी दृष्टिकोण भी शामिल था.

सुजॉय घोष के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राधिका आपटे (अहल्या), सौमित्र चटर्जी (गौतम साधु) और तोता रॉय चौधरी (इंद्र सेन) लीड रोल में थे. फिल्म का क्लाइमैक्स रोंगटे खड़े कर देने वाला था. इस 14 मिनट के शॉर्ट फिल्म में अहिल्या रूपी राधिका अपने पति के साथ मिलकर उस हर व्यक्ति को सजा देती है, जो उसे छूने या उसके काफी करीब आने की कोशिश करता है.

फिल्म की कहानी इंद्र (टोटा) नाम के पुलिस ऑफिसर से शुरू होती है जो एक बूढ़े आर्टिस्ट गौतम (सौमित्र) के घर पहुंचता है. उसे अर्जुन नाम के एक लापता शख्स की तलाश है. उसी मामले में जांच करने के लिए इंस्पेक्टर आता है. गौतम की यंग और खूबसूरत वाइफ अहल्या (राधिका आप्टे) दरवाजा खोलती है. इंस्पेक्टर उसे गौतम की बेटी समझ लेता है. इंस्पेक्टर भी अहल्या की खूबसूरती देखकर मोहित हो जाता है.
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इंस्पेक्टर को घर में मंटलपीस पर कुछ डॉल्स दिखाई देते हैं जिनमें से एक अर्जुन जैसे दिखने वाले शख्स की भी होती है. इंस्पेक्टर इंद्र सेन अपने जेब से फोटो निकालकर उसका मिलान करता है. फिर वह गौतम से अर्जुन के बारे में सवाल पूछने लगता है. इसी बीच अहिल्या घर के ऊपर के कमरे में चली जाती है.

फिल्म के अगले सीन में एक जादुई पत्थर भी दिखाई देता है. गौतम इंस्पेक्टर इंद्र को बताता यह कि इस जादुई पत्थर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि जो कोई भी इसे छूएगा, वो जो चाहे बन जाएगा. इंस्पेक्टर इंद्र उसकी बातों पर यकीन नहीं करता. वो समझता है कि गौतम गिरफ्तारी से बचने के लिए मनगढ़ंत कहानी रच रहा है. गौतम उसे विश्वास दिलाता है और पत्थर को छूने के लिए कहता है.

जादुई पत्थर को छूने के बाद इंस्पेक्टर इंद्र अहिल्या से मिलने के लिए ऊपर के कमरे में जाता है. वहां पर लगे आइने में जब वह देखता है तो उसे गौतम का चेहरा दिखाई देता है. अहिल्या को छूते ही वह भी एक डॉल बन जाता है.

फिल्म का मैसेज भी देती है हर बार अहिल्या ही क्यों पत्थर बने? जिस इंसान का मन और इरादा राधिका को देखकर डगमगा गया, वही पत्थर बना. फिल्म के अंत में एक और व्यक्ति अहिल्या से मिलने आता है. उसकी मूर्ति बनकर टेबल से गिर जाती है.

‘अहल्या’ में एक कम उम्र की पत्नी के किरदार में राधिका आप्टे को बहुत तारीफ मिली थी. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि सादगी से भरी कामुकता लाने वाला यह किरदार उन्हें पसंद है. राधिका ने कहा कि अपनी कामुकता से रिझाने वाली औरत होने के बावजूद उसमें मासूमियत और सादगी है.
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