फिल्मी दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, भीतर उतनी ही पेचीदा भी हो सकती है. कभी शोहरत का वादा, कभी करोड़ों के रिटर्न का सपना और कभी बड़े नामों का भरोसा. मुंबई से सामने आया यह मामला उसी चमक के पीछे छिपे कथित काली कहानी कहता है, जहां एक अभिनेत्री और उसके पति पर फिल्म इंडस्ट्री के नाम पर 11.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगा है.
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्री आकांक्षा अवस्थी और उनके पति विवेक कुमार उर्फ अभिषेक कुमार सिंह चौहान इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में हैं. मुंबई के पंतनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, दोनों पर एक व्यापारी से भारी मुनाफे और फिल्मी कनेक्शन का लालच देकर 11.50 करोड़ रुपये ऐंठने का गंभीर आरोप है.

मुंबई के पंतनगर पुलिस स्टेशन में पीड़ित की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी गई है.पीड़ित हितेश कांतिलाल अजमेरा, जो सीमा शुल्क निकासी के व्यवसाय से जुड़े हैं, ने आरोप लगाया कि आरोपी दंपत्ति ने उन्हें फिल्म उद्योग से जुड़े बड़े कनेक्शन, स्टूडियो और भारी रिटर्न का झांसा देकर निवेश के लिए तैयार किया.

शिकायत के अनुसार आकांक्षा अवस्थी ने खुद को प्रभावशाली फिल्म इंडस्ट्री का नामी चेहरा बताया और अंधेरी (पश्चिम) में ‘एकेएस पाठशाला एंटरटेनमेंट’ नामक फिल्म स्टूडियो तथा कलाकारों के ट्रेनिंग सेंटर का दावा किया. आरोप है कि उन्होंने बडे़ प्रोजेक्ट्स, शोहरत, स्टूडियो के मालिकाना हक और 200 करोड़ रुपए के ब्याज-मुक्त रिटर्न का लालच देकर पीड़ित को निवेश के लिए तैयार किया.
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पीड़ित का कहना है कि आकांक्षा के पति विवेक ने उन्हें बिहार के बेतिया में 300 करोड़ रुपये नकद गोदाम में पड़े होने की कहानी सुनाई. कहा गया कि कानूनी अड़चनों के कारण यह पैसा फंसा है और उसे छुड़ाने के लिए निवेश की आवश्यकता है. बदले में चार दिन के भीतर 200 करोड़ बिना ब्याज लौटाने का वादा किया गया.

मार्च से जुलाई 2024 के बीच पीड़ित ने कथित आरोपियों की दी गई बैंक खातों में अलग-अलग किस्तों में कुल 11.50 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए. आरोपी भरोसा जीतने के लिए उन्हें पटना भी ले गए और कथित गोदाम से जुड़े दस्तावेज़ दिखाए गए.

5 जुलाई 2024 को जब वे बेतिया का रुख करने वाले थे, तब विवेक कुमार मिठाई लेने के बहाने कार से उतरे और फिर कभी वापस नहीं आए. बाद में उनका मोबाइल बंद मिला. पीड़ित ने आरोप लगाया कि आरोपी बहाने बनाते रहे और बाद में संपर्क भी काट दिया.

बहुत देरी के बाद 28 जनवरी 2026 को पंतनगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई. इसमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात जैसी भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है.

पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, कथित फिल्म स्टूडियो के मालिकाना हक, दिखाए गए दस्तावेज़ों और आरोपियों की भूमिकाओं की गहन जांच कर रही है. जांच को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपा जा चुका है ताकि सभी वित्तीय और कानूनी पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण किया जा सके.

<br />पीड़ित हितेश कांतिलाल अजमेरा ने कहा है कि इस धोखाधड़ी की वजह से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा. इस कारण शिकायत दर्ज कराने में देरी हुई, लेकिन अब वे पूरी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

<br />इस मामले ने फिल्म इंडस्ट्री और व्यवसायिक निवेशकों के बीच चल रहे विश्वास की सीमा को भी सवालों के घेरे में ला दिया है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़ी रिटर्न और फिल्म से जुड़े नेटवर्क का लालच धोखाधड़ी को बढ़ावा दे सकता है, यदि कानूनी सत्यापन नहीं किया जाए.

अब पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी, ट्रांजेक्शन के स्रोत की तह तक जांच और दिखाए गए दस्तावेज़ों की सच्चाई की पुष्टि करने में जुटी है. यह मामला यह भी दिखाता है कि भरोसे और लालच के बीच अंतर को समझना कितना जरूरी है
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