भरतनाट्यम डांसर और एक्ट्रेस सुधा चंद्रन का हाल में उनके घर पर हुई माता की चौकी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस वीडियो में सुधा को देवी भजनों पर डांस करत देखा गया. वह भक्ति में इतनी डूबी हुईं थीं कि लोगों को कंट्रोल करना पड़ा. कई लोगों ने इसे ट्रांस जैसी स्थिति बताया. भजन के चरम पर पहुंचते ही सुधा काफी भावुक हो जाती हैं, उनका शरीर बेकाबू हो जाता है, वे फर्श पर कूदने लगती हैं और आसपास के लोगों को उन्हें संभालना पड़ता है.
सुधा चंद्रन के इस व्यहार को देखकर कई भक्तों ने इस पल को “माता रानी का आना” बताया, जिससे सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई. वायरल वीडियो पर बात करते हुए सुधा चंद्रन ने पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट आबरा का डाबरा में खुलकर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता माता आती हैं या नहीं, लेकिन वे आशीर्वाद जरूर देती हैं.”

पारस छाबड़ा ने पूछा, “आपका वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है. माता की चौकी वाला. आपमें माता आती है?” सुधा चंद्रन ने प्यार से जवाब दिया, “ये बहुत बड़ी बात है. मुझे नहीं पता माता आती हैं या नहीं, लेकिन माता जरूर आकर मुझे आशीर्वाद देती हैं.” उन्होंने बताया कि चौकी में पंडित जी थे. पंडित जी उन्हें बताया कि उस दिन 10 मिनट में 4 लीटर पानी पी गई थी. उनमें एक अलग तरह की एनर्जी थी.

इसके अलावा सुधा चंद्रन ने अपने करियर को लेकर भी बात की. सुधा ने अपनी पहली फिल्म ‘मयूरी’ के महत्व को बताया. उन्होंने कहा, “मैंने अपनी जर्नी मयूरी से शुरू की थी. ये एक तेलुगु फिल्म थी. आज अगर बायोपिक की बात करें तो पहली बायोपिक ‘मयूरी’ और ‘नाचे मयूरी’ थी. बाकी बायोपिक में कोई और किरदार निभाता है, लेकिन ये पहली फिल्म थी जिसमें कहानी मेरी थी और मैं ही हीरोइन थी.”
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सुधा चंद्र ने बताया, “बहुत कम उम्र में, पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण, मेरे पापा वहां से मुंबई आ गए थे. वे एक बहुत बड़े डांसर के घर टाइपिस्ट का काम करते थे. वे सोचते थे कि अगर मेरी शादी हो और बेटी हो तो उसे डांसर बनाऊंगा. उसका नाम सुधा राम रखूंगा, क्योंकि जहां वे काम करते थे, उस डांसर का नाम सुधा दोराईस्वामी था. मैंने एक दिन अपने दादा से कहा, आप रोज मुरुगन की बात करते हैं. मैं भी इस भगवान से मिलना चाहती हूं. हम गए. बस चली और सिर्फ 10 किलोमीटर बाद दो बसों की आमने-सामने टक्कर हो गई…”

सुधा चंद्रन ने आगे कहा, “…4-5 दिन बाद मुझे हल्का सा फ्रैक्चर हुआ. मुझे नहीं पता उन्होंने क्या किया. मेरे दाहिने टखने पर हल्की सी कट लगी थी. उन्होंने टांके लगाए, प्लास्टर ऑफ पेरिस लगाया या पता नहीं क्या किया. 15 दिन तक बहुत कोशिश की. तब तक गैंगरीन हो गया था. मामला जिंदगी और मौत का था. फिर मेरा पैर काटना पड़ा. और बड़ा सवाल था- बिना पैर के डांसर क्या करेगी?”

पैर काटे जाने के तीन साल बाद सुधा ने आर्टिफिशियल पैर के साथ 3.5 घंटे का परफॉर्मेंस दिया. डर के कारण वे चाहती थीं कि सिर्फ परिवार के लोग ही मौजूद रहें, लेकिन ऑडिटोरियम खचाखच भरा था. उन्होंने कहा, “जैसे ही पर्दा खुला, ऑडिटोरियम में 1000 लोग थे, पूरा हॉल भरा हुआ था. मैंने एक कदम आगे बढ़ाया.”

सुधा चंद्रन ने कहा, “मेरी दादी बैठी थीं और बोलीं, ‘मैंने भगवान मुरुगन से प्रार्थना की थी. अगर वे सच में हमारे कुलदेवता हैं, तो किसी न किसी रूप में मुझे दर्शन देंगे.’ जैसे ही परफॉर्मेंस शुरू हुई, एक ब्राह्मण ऑडिटोरियम में आए. सिर्फ एक सीट खाली थी. वे अप्पा के पास आकर बैठ गए. उन्होंने कहा, शो के बाद ये कपूर अपनी बेटी को देना. मैंने उनका वॉलेट खोला तो उसमें भगवान मुरुगन की तस्वीर थी.”

एक्ट्रेस ने अपने पिता के आखिरी दिनों को लेकर भी भावुक होकर बात की. उन्होंने बताया, “मैं आईसीयू के बाहर बैठी थी. अचानक मैंने एक मोर देखा. जैसे ही मोर देखा, मैंने कहा, 10 मिनट में खबर आ जाएगी. 5 मिनट के अंदर डॉक्टर ने कहा, वे जा रहे हैं. मैंने कहा, मुझे पता है. वे लेने आ गए हैं. 5 मिनट के अंदर पापा का निधन हो गया.”
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