1990 के दशक में मशहूर डायरेक्टर इंद्र कुमार ने एक सपना देखा था जिसे सच होने में दशकों लग गए. उन्होंने ‘रिश्ता’ नाम की एक फिल्म में अमिताभ बच्चन और आमिर खान को एक साथ लाने का प्लान बनाया था. फिल्म की लॉन्च सेरेमनी पहले ही हो चुकी थी और दर्शक इस ऐतिहासिक कोलैबोरेशन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. हालांकि, इंद्र कुमार की अपनी मुश्किलों और फिल्म ‘इश्क’ के प्रति उनकी कमिटमेंट्स की वजह से, यह प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया. अमिताभ बच्चन के कद के प्रति सम्मान और अपनी क्रिएटिव लिमिटेशंस के डर ने इंद्र कुमार को इस मेगा-प्रोजेक्ट को छोड़ने पर मजबूर कर दिया, एक ऐसी कहानी जो आज भी काफी हद तक अनकही है.
नई दिल्ली. बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे प्रोजेक्ट्स की कहानियों से भरा पड़ा है, जो अगर पूरे हो जाते तो भारतीय सिनेमा का रुख बदल देते. 1990 के दशक के आखिर में, एक फिल्म की घोषणा हुई जिसने पूरी इंडस्ट्री में हलचल मचा दी. यह फिल्म थी ‘रिश्ता’, जिसे इंद्र कुमार डायरेक्ट करने वाले थे. इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टार कास्ट थी- पहली बार सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ आमिर खान एक साथ स्क्रीन शेयर करने वाले थे. अफसोस, यह ‘रिश्ता’ कभी बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाया.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 1990 के दशक के आखिर में इंद्र कुमार एक ऐसे डायरेक्टर के रूप में उभरे थे जिनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता था. ‘दिल’, ‘बेटा’ और ‘राजा’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, वह कुछ ऐसा करना चाहते थे जो बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दे. उन्होंने अमिताभ बच्चन और आमिर खान को एक स्क्रिप्ट सुनाई, जो दोनों एक्टर्स को बहुत पसंद आई. फिल्म का नाम ‘रिश्ता’ रखा गया. फिल्म की लॉन्च सेरेमनी बहुत शानदार थी. इंडस्ट्री के अंदरूनी लोगों का मानना था कि यह सदी का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा. एक तरफ अमिताभ बच्चन की दमदार एक्टिंग थी, तो दूसरी तरफ आमिर खान की बारीकियों भरी परफॉर्मेंस. दोनों का कॉम्बिनेशन किसी भी फिल्म की सफलता की गारंटी था.

कहा जाता है कि उस समय इंद्र कुमार अपनी फिल्म ‘इश्क’ की शूटिंग में बिजी थे, जिसमें आमिर खान, अजय देवगन, जूही चावला और काजोल लीड रोल में थे. ‘इश्क’ बहुत बड़े बजट की फिल्म थी. एक बार मीडिया से बातचीत के दौरान इंद्र कुमार ने कहा था कि जब ‘रिश्ता’ प्रोजेक्ट लॉन्च हुआ तो उन पर ‘इश्क’ को पूरा करने का बहुत ज्यादा प्रेशर था. एक डायरेक्टर के तौर पर उन्हें लगा कि एक साथ दो फिल्में संभालना, जिनमें से एक इमोशनल ड्रामा और ‘रिश्ता’ जैसी मेगा-स्टारर फिल्म थी, उनके लिए बहुत ज्यादा हो रहा था. उन्हें लगा कि वह एक साथ दो घोड़ों पर सवार होने की कोशिश कर रहे हैं और फिल्म के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे.
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इंद्र कुमार की सबसे बड़ी चिंता स्क्रिप्ट थी. उन्हें डर था कि वह अमिताभ बच्चन जैसे लेजेंडरी एक्टर के रोल के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे. अमिताभ बच्चन की पर्सनैलिटी इतनी बड़ी थी कि उनके लिए लिखे गए रोल में थोड़ी सी भी कमी फिल्म को खराब कर सकती थी. इंद्र कुमार का कहना था, ‘अमित जी के साथ काम करना किसी भी डायरेक्टर के लिए सौभाग्य की बात है, लेकिन उनके कद के हिसाब से फिल्म बनाना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. मुझे डर था कि मैं ‘रिश्ता’ की कहानी को उस लेवल तक नहीं ले जा पाऊंगा, जिसकी उम्मीद अमिताभ बच्चन और उनके फैंस करते थे.’

इंद्र कुमार पहले से ही आमिर खान के साथ काम कर रहे थे, जो अपने काम के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं. इंद्र कुमार को लगा कि अगर वह ‘इश्क’ के साथ ‘रिश्ता’ पर भी काम करते रहे, तो वह क्रिएटिव रूप से थक जाएंगे. वह नहीं चाहते थे कि आमिर खान और अमिताभ बच्चन के बीच यह पहला कोलैबोरेशन किसी भी तरह की जल्दबाजी से खराब हो.

आमतौर पर बॉलीवुड में डायरेक्टर फिल्मों में देरी करते हैं या उन्हें टाल देते हैं, लेकिन इंद्र कुमार ने ईमानदारी का रास्ता चुना. वह सीधे अमिताभ बच्चन के पास गए और उन्हें अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बताया. उन्होंने माना कि वह उस समय ‘रिश्ता’ जैसी फिल्म को संभालने के लिए तैयार नहीं थे. अमिताभ बच्चन ने एक सच्चे कलाकार की तरह उनकी स्थिति को समझा और डायरेक्टर के फैसले का सम्मान किया.

अगर ‘रिश्ता’ बन जाती तो हमें अमिताभ बच्चन और आमिर खान को स्क्रीन पर एक साथ देखने के लिए ‘ठग्स ऑफ हिंदुस्तान’ (2018) तक इंतजार नहीं करना पड़ता. ‘रिश्ता’ एक इमोशन से भरा फैमिली ड्रामा होने वाली थी, शायद आमिर खान की ‘राजा हिंदुस्तानी’ और अमिताभ बच्चन के ‘मोहब्बतें’ दौर का एक सुनहरा मिश्रण.

सिनेमा की दुनिया में कई शानदार आइडिया सिर्फ इसलिए अधूरे रह जाते हैं क्योंकि डायरेक्टर का विजन और हालात मेल नहीं खाते. ‘रिश्ता’ भी ऐसी ही एक फिल्म बन गई जो कागज पर तो पक्का हिट थी, लेकिन कभी पर्दे पर नहीं आ पाई. इंद्र कुमार की आशंका और ईमानदारी आज भी फिल्म इंडस्ट्री में एक मिसाल मानी जाती है कि किसी फिल्म के साथ ‘न्याय’ करने के लिए तैयार हुए बिना उसे बनाने से बेहतर है कि उसे बनाया ही न जाए.
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