राज्यसभा में अपने पहले भाषण के दौरान कमल हासन ने सिनेमा और राजनीति का अनोखा मेल दिखाया. उन्होंने फिल्म कल्कि 2898 AD का मशहूर डायलॉग ‘जगन्नाथ रथ चक्रालु वस्तुन्नायी’ दोहराकर लोकतांत्रिक बदलाव की बात कही. कमल ने साफ किया कि यह किसी व्यक्ति या सरकार पर हमला नहीं, बल्कि विचारों की चेतावनी है. उनका कहना था कि लोकतंत्र मतभेदों को कुचल सकता है, लेकिन जनता को नहीं.
कमल हासन का वीडियो वायरल हो रहा है.
अभिनेता से राजनेता बने कमल हासन ने हाल ही में राज्यसभा में अपने पहले भाषण के दौरान ऐसा पल रचा, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हो रही है. अपने संबोधन में कमल हासन ने नाग अश्विन की चर्चित तेलुगु फिल्म ‘कल्कि 2898 AD’ का एक प्रसिद्ध संवाद दोहराया और उसके जरिए लोकतंत्र, विचारों की टकराहट और बदलाव की अनिवार्यता पर जोर दिया.
कल्कि फिल्म डायलॉग से दी विरोधियों को चेतावनी
राज्यसभा में कागज देखकर भाषण पढ़ते हुए कमल हासन ने कहा, ‘आइए, हमारी मदद कीजिए, इस लोकतांत्रिक गणराज्य को आगे बढ़ाने के लिए अपनी लोकतांत्रिक ऊर्जा दीजिए या फिर इस लोकतांत्रिक गणराज्य के रास्ते से हट जाइए.’ इसके बाद उन्होंने तेलुगु में वह पंक्ति कही, जिसने सबका ध्यान खींच लिया. उन्होंने कहा- ‘जगन्नाथ रथ चक्रालु वस्तुन्नायी, वस्तुन्नायी’ (भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिए आ रहे हैं) इसके तुरंत बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘तेलुगु लोग समझ जाएंगे कि मैं क्या कहना चाहता हूं.’
‘लोकतांत्रिक रथ मतभेदों को कुचल सकता है’
कमल हासन ने यह भी साफ किया कि उनका बयान किसी व्यक्ति या सरकार पर हमला नहीं है, बल्कि यह विचारों की टकराव है. उन्होंने कहा, ‘यह लोकतांत्रिक रथ मतभेदों को कुचल सकता है, लेकिन लोगों को नहीं और हम ऐसा होने नहीं देंगे.’ इस बयान को संसद में लोकतंत्र की मर्यादा और जनहित की रक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है.
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