महाशिवरात्रि के मौके पर चारों तरफ बस एक ही भक्ति गीत की गूंज सुनाई देने लगती है. यह गाना न सिर्फ मंदिरों में बजता है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी छाया रहता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि यूट्यूब पर इसे अब तक 97.5 करोड़ से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है। लेकिन इस गाने की कामयाबी के पीछे एक गहरी उदासी भी छिपी है. इस गाने को पर्दे पर जिस एक्टर ने अपनी सादगी और भक्ति से अमर कर दिया, वो आज हमारे बीच नहीं हैं. कोविड काल के दौरान इस उभरते हुए सितारे का अचानक चले जाना पूरी दुनिया के लिए एक गहरा सदमा था.
नई दिल्ली. महाशिवरात्रि के आते ही चारों तरफ बस एक ही गाने की गूंज सुनाई देने लगती है. मंदिरों से लेकर सोशल मीडिया की रील्स तक, भगवान शिव पर बना यह गीत हर जगह छाया रहता है. इस गाने में भक्ति का ऐसा रस है कि लोग इसे सुने बिना रह ही नहीं पाते, यही वजह है कि यूट्यूब पर इसे अब तक 97.5 करोड़ से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है.

साल 2018 में आई फिल्म का यह गाना आज भी लोगों के दिलों के बेहद करीब है. इसकी एक बड़ी वजह बॉलीवुड के वो मशहूर स्टार भी हैं, जिन्होंने इस गाने को पर्दे पर जिया था, लेकिन अफसोस कि कोरोना महामारी के दौरान उनके अचानक निधन से पूरी इंडस्ट्री सन्न रह गई थी.

हम बात कर रहे हैं फिल्म केदारनाथ के सुपरहिट गीत ‘नमो नमो’ की. अमित त्रिवेदी की जादुई आवाज और संगीत से सजे इस गाने को अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखा है. गाने की पहली ही लाइन से आप भगवान शिव की भक्ति में डूब जाते हैं. केदारनाथ की बर्फीली वादियों और खूबसूरत पहाड़ों के बीच फिल्माया गया यह गाना आज भी दर्शकों पर गहरा असर छोड़ता है.
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यूट्यूब पर 97.5 करोड़ से ज्यादा व्यूज के साथ यह गाना बॉलीवुड के सबसे पॉपुलर शिव गीतों में से एक बन चुका है. इस गाने में दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के साथ सारा अली खान नजर आई थीं. गाने में सुशांत को एक पिट्ठू के किरदार में दिखाया गया है, जो केदारनाथ की कठिन चढ़ाई के दौरान बच्चों और बुजुर्गों को अपनी पीठ पर बिठाकर मंदिर तक पहुंचाता हैं. सुशांत के चले जाने के बाद फैंस के लिए यह गाना और भी भावुक हो गया है.

अभिषेक कपूर के निर्देशन में बनी ‘केदारनाथ’ एक रोमांटिक फिल्म है. इसकी कहानी एक अमीर हिंदू ब्राह्मण लड़की और एक मुस्लिम लड़के की प्रेम कहानी है, जो अलग-अलग धर्मों के होने के बावजूद एक-दूसरे के करीब आते हैं. लड़की का परिवार केदारनाथ मंदिर के पास लॉज और दुकानें चलाता है, वहीं लड़का वहीं एक पिट्ठू के रूप में काम करता है.

फिल्म में जैसे-जैसे दोनों का प्यार गहरा होता है, उनके सामने परिवार के विरोध और समाज की कई मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। लेकिन असली इम्तिहान तब आता है, जब 2013 में उत्तराखंड में आई भयानक बाढ़ सब कुछ तहस-नहस कर देती है. कुदरत के उस कहर के बीच दोनों को अपनी जान बचाने और अपने प्यार को साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है. इस फिल्म ने दुनियाभर में करीब 102.77 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की थी.

सुशांत की बात करें, तो बॉलीवुड में कदम रखने से पहले वो टीवी की दुनिया का एक जाना-माना चेहरा थे. साल 2013 में फिल्म ‘काय पो चे’ से उन्होंने अपना फिल्मी सफर शुरू किया और इसके बाद ‘शुद्ध देसी रोमांस’, ‘पीके’, ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘राब्ता’, ‘केदारनाथ’, ‘छिछोरे’ और ‘दिल बेचारा’ जैसी कई बेहतरीन फिल्में दीं.

14 जून 2020 का वो दिन पूरी दुनिया के लिए एक सदमे जैसा था, जब सुशांत सिंह राजपूत मुंबई में अपने घर में मृत पाए गए थे. बताया जाता है कि वो काफी समय से डिप्रेशन से जूझ रहे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनकी मौत की वजह दम घुटने को बताया गया और इसे खुदकुशी का मामला करार दिया गया.
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