नसीरुद्दीन शाह को एक यूनिवर्सिटी में उर्दू पर लेक्चर देने का न्योता मिला था, लेकिन कार्यक्रम से एक रात पहले उनका इनविटेशन रद्द कर दिया गया, जिससे अभिनेता आहत हो गए. उन्होंने इसे अपमानजनक बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की. इस विवाद पर गीतकार मनोज मुंतशिर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय स्वतंत्र संस्थान होते हैं. उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को महान कलाकार बताते हुए सम्मान जताया, लेकिन साथ ही ‘नए भारत’ की सोच का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें आज का भारत ज्यादा बेहतर लगता है.
मनोज ने नसीरुद्दीन के बयान पर रिएक्शन दिया.
हालांकि, यह उत्साह ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. 31 जनवरी की रात को नसीरुद्दीन शाह को एक ईमेल मिला, जिसमें उन्हें सूचित किया गया कि उनका आमंत्रण वापस ले लिया गया है और अब उन्हें विश्वविद्यालय के इस कार्यक्रम में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है. अचानक आए इस फैसले से शाह आहत हो गए. उन्होंने बड़े ही दुखी मन से एक नोट लिखा और अपनी नाराजगी जाहिर की. शाह का कहना था कि बिना किसी स्पष्ट कारण के आखिरी वक्त पर बुलावा रद्द किया जाना न सिर्फ निराशाजनक है, बल्कि अपमानजनक भी लगता है.
मनोज मुंतशिर ने किया रिएक्ट
इस पूरे विवाद पर अब गीतकार और लेखक मनोज मुंतशिर की प्रतिक्रिया सामने आई है. एक कार्यक्रम में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए मनोज मुंतशिर ने कहा कि विश्वविद्यालय स्वतंत्र रूप से काम करने वाली संस्थाएं होती हैं और उनका अपना प्रबंधन होता है. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी हाल ही में मिली कि विश्वविद्यालय सरकार द्वारा संचालित होते हैं, जो उनके लिए भी नई बात है. मुंतशिर ने साफ किया कि उन्हें नहीं पता कि उस विश्वविद्यालय में वास्तव में क्या हुआ, लेकिन उन्होंने नसीरुद्दीन शाह की कला और व्यक्तित्व की खुलकर तारीफ की.
मनोज को पसंद है नया भारत
मनोज मुंतशिर ने कहा, ‘नसीरुद्दीन शाह एक महान कलाकार हैं, एक बेहतरीन अभिनेता हैं और हम सब उनका बहुत सम्मान करते हैं’. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने शाह के एक पुराने बयान पर भी अपनी राय रखी. मुंतशिर ने कहा कि उन्होंने नसीरुद्दीन शाह का वह बयान पढ़ा था, जिसमें अभिनेता ने कहा था कि जिस भारत में वे बड़े हुए, वह आज का भारत नहीं है. इस पर मुंतशिर ने कहा कि शायद शाह अपने नजरिए से सही हों, लेकिन उनके अनुसार जिस देश में वे और शाह बड़े हुए, वह तुष्टिकरण का देश था.
मनोज मुंतशिर के मुताबिक आज का भारत एक नया, बेहतर और मजबूत भारत है, जिसे वे ज्यादा पसंद करते हैं. उनका यह बयान भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. एक ओर नसीरुद्दीन शाह अभिव्यक्ति की आज़ादी और सम्मान की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मनोज मुंतशिर ‘नए भारत’ की सोच को सामने रख रहे हैं. इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या शैक्षणिक संस्थानों में विचारों और संवाद के लिए पर्याप्त जगह बची है, या फिर हर आमंत्रण अब विवाद की वजह बनता जा रहा है.
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प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें
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