अभिनेत्री श्रीदेवी की पहली मलयालम फिल्म ‘तुलावर्षम’ थी, जिसमें उनके हीरो सुधीर थे. ‘केली नलिनम विडारुमो…’ गाने के सीन में दोनों की जोड़ी आज भी याद की जाती है. लेकिन सुधीर के निजी जीवन की सबसे अहम नायिका खदीजा थीं, जिन्हें दर्शकों ने बाद में ‘थेन्माविन कोम्बथ’ में देखा. खदीजा और सुधीर की लव स्टोरी फिल्म इंडस्ट्री में किसी मिसाल से कम नहीं है, लेकिन दोनों की लव स्टोरी का दर्दनाक अंत था.
‘थेन्माविन कोम्बथ’ में नजर आईं एक्ट्रेस खदीजा ने इस फिल्म के हिंदी रीमेक ‘सात रंग के सपने’ में भी काम किया, जो उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई. खदीजा कलामंडलम से भरतनाट्यम सीखने वाली पहली मुस्लिम छात्रा भी थीं.

खदीजा ने अपने सपनों की खातिर अपना सबकुछ ताक पर रख दिया था. एक्ट्रेस अपना परिवार और शादीशुदा जिंदगी छोड़कर अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए मद्रास चली गईं.‘विरुधन शंकु’ में उनका छोटा लेकिन प्रभावशाली किरदार आज भी याद किया जाता है.

उन्होंने भले ही बड़ी भूमिकाएं कम की हों, लेकिन उनकी मौजूदगी हमेशा दिल छू लेने वाली रही. दूसरों की मदद करना उनके स्वभाव में था. वो फिल्म इंडस्ट्री में अपने सभी दोस्तों के लिए अपने हाथों से खाना बनाती थीं और खदीजा की इस स्वभाव के चलते ही सुधीर उनके दोस्त बने थे.
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खदीजा सुधीर से उम्र में 15 साल बड़ी थीं. कोडंबक्कम में दोनों का लिव-इन रिलेशनशिप किसी से छुपा नहीं था. सुधीर ने उस रिश्ते को कभी नकारा नहीं, लेकिन वक्त बदला—फिल्में कम होती गईं, काम के साथ-साथ ज़िंदगी की स्थिरता भी डगमगाने लगी.

इसी दौर में खदीजा ने ईसाई भक्ति मार्ग अपनाया. ध्यान और आत्मचिंतन के बाद उन्होंने एक कठोर फैसला लिया—कि उनकी वजह से सुधीर की ज़िंदगी और न बिगड़े. दोस्त मनु के साथ सुधीर मंजेरी लौटे और फिर कोझिकोड चले गए.

इस रिश्ते के टूटने के बाद सुधीर पूरी तरह बिखर गए. शराब ने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया. एक्टर को शराब की ऐसी लत लगी कि उनका बना बनाया करियर चौपट हो गया. उन्हें इंडस्ट्री ने दर किनार कर दिया और वो दिन-रात नशे की लत में धुत रहने लगे.

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