बॉलीवुड की चुलबुली एक्ट्रेस को कौन भूल सकता है, जिसने महज 16 साल की उम्र में गोविंदा के साथ डेब्यू किया और पहली ही फिल्म से बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दियाय वह न सिर्फ एक बेहतरीन अदाकारा थी, बल्कि अपनी जादुई आवाज से पॉप म्यूजिक की दुनिया पर भी राज करती थी. लेकिन जब एक्ट्रेस का करियर सातवें आसमान पर था, तभी एक खौफनाक बीमारी ने उनकी जिंदगी में दस्तक दी. पैरालिसिस ने न सिर्फ मुस्कान छीन ली, बल्कि रातों-रात ग्लैमर की दुनिया से भी एक्ट्रेस को दूर कर दिया.
नई दिल्ली. 90 के दशक में एक हीरोइन ने अपनी आवाज और अदाकारी दोनों से लोगों का दिल जीता. महज 16 साल की उम्र में गोविंदा और चंकी पांडे जैसे बड़े सितारों के साथ बॉलीवुड में कदम रखा और देखते ही देखते छा गई. बात सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं थी. वह एमटीवी की मशहूर वीजे भी रही और उनके शो ‘एक दो तीन’ ने घर-घर में पहचान दिलाई.

हम बात कर रहे हैं रागेश्वरी लूंबा की. साल 1993 में आई सुपरहिट फिल्म आंखें से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की. इसके बाद वह अक्षय कुमार और सैफ अली खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ में भी काम किाय. 90 के दशक के आखिरी सालों में उन्होंने ‘दिल कितना नादान है’ और ‘जिद’ जैसी कई फिल्मों में काम किया.

एक्टिंग के साथ साथ-साथ वह उस दौर की एक बड़ी पॉप आइकॉन भी बनीं. ‘दुनिया’, ‘प्यार का राग’ और ‘सच का साथ’ जैसे उनके गाने हर किसी की जुबान पर थे. साल 2000 में उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर ‘Y2K साल दो हजार’ एल्बम रिलीज किया. जब उनका करियर ऊंचाइयों पर था, तभी किस्मत ने एक करवट ली. साल 2000 में अपना एल्बम रिलीज होने के महज एक हफ्ते के भीतर उन्हें मलेरिया हुआ और फिर उनकी तबीयत इतनी बिगड़ी कि उन्हें बेल्स पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया. इसकी वजह से उन्हें अपने चमकते करियर पर ब्रेक लगाना पड़ा.
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बीमारी के बाद रागेश्वरी ने ग्लैमर की दुनिया से पूरी तरह दूरी बना ली. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. अगले एक साल तक उन्होंने फिजियोथेरेपी, इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन और योग का सहारा लिया. इन मुश्किल हालात ने उनकी हिम्मत को कम करने के बजाय उन्हें अंदर से और मजबूत बना दिया. उन्होंने न सिर्फ अपने शरीर को ठीक करने पर काम किया, बल्कि खुद को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से भी ऊंचाइयों पर ले गईं.

अपनी इस जंग को याद करते हुए रागेश्वरी ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि साल 2000 में चेहरे के पैरालिसिस के दौरान ही उन्होंने योग की शुरुआत की थी. वह अपने टेढ़े चेहरे और टूटे हुए हौसले के साथ सैकड़ों छात्रों के बीच योग क्लास में जाती थीं. उनके गुरुओं ने उन्हें सिखाया कि योग का मतलब अपनी कमियों को स्वीकार करना और अपने भीतर की ताकत को पहचानना है. इसी विनम्रता ने उन्हें एक बार फिर से खड़ा होने की हिम्मत दी.

बीमारी की जंग जीतने के बाद राजेश्वरी ने खुद को पूरी तरह बदल लिया. आज वह एक मशहूर माइंडफुलनेस और मेनिफेस्टेशन कोच के रूप में पहचानी जाती हैं और अपने मोटिवेशनल भाषणों से लोगों की जिंदगी संवार रही हैं. वह ‘पेंग्विन इंडिया’ के साथ एक लेखिका के तौर पर भी जुड़ीं. साल 2012 में वह लंदन शिफ्ट हो गईं, जहां उनकी मुलाकात ह्यूमन राइट्स लॉयर सुधांशु स्वरूप से हुई. जल्द ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया और उन्होंने साथ जिंदगी बिताने का फैसला किया.

रागेश्वरी और सुधांशु ने साल 2014 में शादी की. अपने रिश्ते की सादगी पर बात करते हुए उन्होंने एक बार बताया था कि उन्हें सोशल मीडिया पर एनिवर्सरी या बर्थडे विश करने की जरूरत महसूस नहीं होती, क्योंकि वह आज भी बच्चों की तरह एक-दूसरे को हाथ से लिखे नोट्स देते हैं. रागेश्वरी ने यह भी साझा किया कि जब वह अपने पति से मिलीं, तब उनकी उम्र 39 साल थी और सुधांशु 41 के थे, जो यह बताता है कि प्यार के लिए कोई उम्र नहीं होती.

आज रागेश्वरी एक सफल लाइफ कोच होने के साथ-साथ एक 10 साल की बेटी की मां भी हैं. उन्होंने खुद को एक ‘माइंडफुलनेस स्पीकर’ के तौर पर नए सिरे से स्थापित किया है. वह दुनियाभर में लोगों को यह सिखाती हैं कि सफलता और मानसिक शांति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. ग्लैमर की चकाचौंध से दूर अब रागेश्वरी लोगों को अपनी महत्वाकांक्षाओं और सुकून भरी जिंदगी के बीच सही तालमेल बिठाने के लिए प्रेरित कर रही हैं.
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